महोदय, नमस्कार.
अक्सर भारतीय रेल की ओर से सुविधाओं के बारे में बड़े बड़े दावे किये जाते है, वास्तव में हम मुसाफिरों को रेल गाडी के सफ़र में बहुत सारी दिक्कते आती है. दिन में सफ़र करने पर भी रात्रि भाडा ( आरक्षण के वास्ते ) चुकाना पड़ता है, उस के बावजूद गाड़ी में आरक्षण डिब्बे में हमें बैठने नहीं मिलता. बहुत ही संक्षेप उदहारण के साथ लिख रहा हूँ.
मेने दिनांक २८-११-२०११ सोमवार के दिन लिए अपने भाई और भाभी के साथ बोरीवली से वड़ोदरा आने के वास्ते आरक्षण करवाया था. (PNR NO. 855-0033321, TICKET NO. 68496587). गाडी नंबर १९०२३ फेरोजपुर जनता एक्सप्रेस, कोच नंबर था एस-४, बर्थ ४३, ४६ और ४८ था एवं डिब्बा क्रमांक प.रे ००२३०० था. उस डिब्बे में पास धारको ने कब्ज़ा कर रखा था, हमारा आरक्षण होते हुए भी हमें बैठने नहीं दिया जा रहा था, क्या ये उचित है ? वोही पास धारको ने हमसे झगडा भी किया /
थोड़ी देर बाद जब टिकट चेकर साहब आये , उनसे हमने शिकायत की, टिकट चेकर के पास आरक्षण सूचि थी, फिर भी वो हमसे सवाल कर रहे थे कौन आप की जगह पर बैठा है? हैरानी हुई जवाब सुनकर, बाद में उन्होंने हमें हमारी जगह पर ठीक तरह से बिठाया / अब सवाल ये है के जो इंसान तीन महीने पहले से टिकट आरक्षण कराता है , जो दिन में सफ़र करने के बावजूद रात्रि आरक्षण किराया देता है, वो अपने जगह बैठ भी न सके ये कैसी सुविधा है?
में जानना चाहता हूँ के पास धारक , आरक्षण कोच में या सुपर फास्ट गाडी में सफ़र कर सकता है? खुद पास धारक अपने डिब्बे से आम इंसान को, टिकट होने के बावजूद दक्के देके बहार उतार देत है, ये भारतीय रेल का कैसा इंसाफ है? सख्ती बरतने की ज़रूरत है/
दूसरी शिकायत मेरी ये थी के सीट नंबर ४८ बैठने लायक नहीं थी, पीछे से सपोर्ट नहीं था इसी लिए बैठने में असुविधा हो रही थी, इसकी जानकारी भी टिकट चेकर को दे थी, लेकिन उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया / उस टिकट चेकर ने अपना नाम भी नहीं बताया/ सिर्फ जनता से पैसे कैसे वसूले जाये टिकट चेकर इस में ज्यादा ध्यान देते है/ दु:खद बात है /
में उम्मीद करता हूँ इस विषय में जाँच होगी और छोटे से छोटी शिकायत पर ध्यान ज़रूर देंगे / संतोष कारक जवाब की उम्मीद करता हूँ./
धन्यवाद् /
कनैयालाल गेलाराम नागपाल, वड़ोदरा.
दिनांक : ३०-११-२०११